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> Som Pradosh Vrat 2024: सोम प्रदोष व्रत 2024: शिव कृपा पाने का विशेष अवसर

Som Pradosh Vrat 2024: सोम प्रदोष व्रत 2024: शिव कृपा पाने का विशेष अवसर

Som Pradosh Vrat 2024 kab hai tidhi mahatva puja vidhi vrat katha

Som Pradosh Vrat 2024: हिंदू धर्म में सोम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो सोमवार (Somwar) पड़ने वाले प्रदोष को किया जाता है। प्रदोष का अर्थ होता है – त्रयोदशी तिथि (Trayodashi Tithi) के दिन सूर्यास्त के बाद का समय। आइए जानते हैं सोम प्रदोष व्रत 2024 की तिथि, महत्व, पूजा विधि और व्रत कथा के बारे में.

सोम प्रदोष व्रत 2024 तिथि (Som Pradosh Vrat 2024 Tithi)

सोम प्रदोष व्रत साल में कई बार आता है, लेकिन इस साल पहला सोम प्रदोष व्रत 13 मई 2024 को पड़ा चुका है। अगला सोम प्रदोष व्रत 10 जून 2024 को पड़ेगा। आप सोम प्रदोष व्रत की सही तिथि किसी भी पंचांग (Panchang) से पता कर सकते हैं।

सोम प्रदोष व्रत का महत्व (Som Pradosh Vrat ka Mahatva)

सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से:

  • वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है।
  • संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
  • मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
  • रोग-बाधा दूर होती है।
  • जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।


सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि (Som Pradosh Vrat ki Puja Vidhi)

  • व्रत संकल्प: सोम प्रदोष से एक दिन पहले यानी रविवार (Sunday) को सूर्योदय से पहले उठकर व्रत का संकल्प लें।
  • स्नान और साफ कपड़े: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान तैयार करें: पूजा के लिए एक चौकी पर शुद्ध आसन बिछाएं। भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग स्थापित करें।
  • पंचामृत से स्नान: शिवलिंग या तस्वीर का पंचामृत ( दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण) से अभिषेक करें।
  • जल और बेलपत्र अर्घ्य: शुद्ध जल और बेलपत्र अर्घ्य दें।
  • चंदन और भस्म: शिवलिंग या तस्वीर पर चंदन और भस्म का तिलक लगाएं।
  • धूप और दीप: धूप जलाएं और दीप प्रज्वलित करें।
  • शिव मंत्र का जाप: “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
  • आरती और भोग: शिव जी की आरती करें और उनका मनपसंद भोग लगाएं।
  • कथा वाचन: सोम प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें।
  • व्रत का पारण: अगले दिन (मंगलवार) सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें।
  • ध्यान दें: यह एक सामान्य पूजा विधि है, आप किसी भी विद्वान ब्राह्मण से सलाह लेकर विधि को विस्तृत कर सकते हैं।

सोम प्रदोष व्रत कथा (Som Pradosh Vrat Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राजा हिमपत नाम के एक राजा थे। उनके राज्य में लंबे समय से सूखा पड़ा हुआ था। राज्य की प्रजा भुखमरी से त्रस्त थी। राजा ने अपने दरबारियों से उपाय पूछे। दरबारियों ने सलाह दी कि सोम प्रदोष का व्रत किया जाए।

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