Search
Close this search box.
> जून 2024 में एकादशी व्रत और त्योहार: विशेष जानकारी और महत्व

जून 2024 में एकादशी व्रत और त्योहार: विशेष जानकारी और महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, एकादशी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत हर महीने में दो बार आता है, एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में। जून 2024 में भी दो महत्वपूर्ण एकादशी व्रत हैं, जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यहां जून 2024 में आने वाली एकादशी व्रत और त्योहार की सूची और उनके विशेष पहलुओं की जानकारी दी गई है।

जून 2024 में एकादशी व्रत और त्योहार की सूची

  1. अपरा एकादशी – 6 जून 2024 (गुरुवार)
  2. निर्जला एकादशी – 20 जून 2024 (गुरुवार)

1. अपरा एकादशी (6 जून 2024)

अपरा एकादशी, जिसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस व्रत का धार्मिक महत्व अत्यधिक है और यह व्रतधारियों को विशेष पुण्य की प्राप्ति कराता है।

महत्व:

  • अपरा एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है।
  • धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को अनेकों लाभ प्राप्त होते हैं।

2. निर्जला एकादशी (20 जून 2024)

निर्जला एकादशी हिंदू कैलेंडर की सबसे कठिन और महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि महाभारत के भीमसेन ने इस व्रत को रखा था। इस व्रत में बिना जल ग्रहण किए उपवास रखा जाता है।

महत्व:

  • निर्जला एकादशी का व्रत करने से साल भर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है।
  • यह व्रत शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • इस व्रत के पालन से व्यक्ति को स्वास्थ्य, दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

एकादशी व्रत की विधि

  1. स्नान और संकल्प: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  2. पूजा: भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप, धूप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  3. उपवास: एकादशी के दिन पूर्ण उपवास रखें। निर्जला एकादशी में जल का भी सेवन न करें।
  4. भजन और कीर्तन: दिनभर भगवान के भजन और कीर्तन करें और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें।
  5. द्वादशी पारण: अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करें। सबसे पहले ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें।

निष्कर्ष

जून 2024 की एकादशी व्रत और त्योहार अत्यधिक पुण्यदायक और फलदायी माने जाते हैं। अपरा और निर्जला एकादशी का व्रत न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि यह शारीरिक और मानसिक शुद्धि का भी प्रतीक है। इन व्रतों का पालन करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। हिन्दू धर्म में इन व्रतों का विशेष महत्व है और इन्हें श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाना चाहिए।

Author
Related Post
ads

Latest Post