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Ashunya Shayan Vrat Upay: अशून्य शयन व्रत: सुखी वैवाहिक जीवन का अनोखा उपाय

Ashunya Shayan Vrat Upay in hindi

हिंदू धर्म में कई महत्वपूर्ण व्रतों का वर्णन मिलता है, जिनमें से एक है अशून्य शयन व्रत। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है और इसे करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है। आइए जानते हैं अशून्य शयन व्रत की कथा, पूजा विधि और महत्व के बारे में:

अशून्य शयन व्रत की कथा (Ashunya Shayan Vrat Katha Upay)

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार दक्ष प्रजापति नामक राजा ने यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने इसमें सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन भगवान शिव और माता पार्वती को नहीं बुलाया। माता पार्वती को इस बात का दुख हुआ और उन्होंने भगवान शिव से पूछा कि उन्हें दक्ष के यज्ञ में क्यों नहीं बुलाया गया। भगवान शिव ने समझाया कि दक्ष उनका ससुर है और उनके मन में उनके प्रति आदर नहीं है।

फिर भी, माता पार्वती अपने पिता के यज्ञ में शामिल होना चाहती थीं। भगवान शिव ने उन्हें ऐसा न करने के लिए मना किया, लेकिन माता पार्वती नहीं मानीं। वे अपने गणों के साथ यज्ञ स्थल पर पहुंच गईं। दक्ष को यह देखकर क्रोध आ गया और उन्होंने भगवान शिव का अपमान किया। इस अपमान से क्रोधित होकर वीरभद्र नामक शिवभक्त ने दक्ष का वध कर दिया।

इस घटना के बाद भगवान शिव और माता पार्वती कैलाश पर्वत पर चले गए। माता पार्वती दुखी थीं कि उनके कारण ही यह सब हुआ। भगवान शिव ने उन्हें शांत किया और कहा कि वह उनसे विवाह करना चाहते हैं। माता पार्वती ने सहमति जताई और कैलाश पर्वत पर ही उनका विवाह हुआ। माना जाता है कि यही वह दिन था जब चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि के बाद पड़ने वाले सोमवार को भगवान शिव और माता पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था। इसी उपलक्ष्य में अशून्य शयन व्रत किया जाता है।

अशून्य शयन व्रत का महत्व (Ashunya Shayan Vrat ka Mahatva):

  • सुखी वैवाहिक जीवन: यह व्रत करने से दंपती के बीच प्रेम और सम्मान बढ़ता है। वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
  • पार्वती जी का आशीर्वाद: माता पार्वती सौभाग्य और वैवाहिक सुख की अधिष्ठात्री देवी हैं। यह व्रत करने से माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • मनोवांछित फल की प्राप्ति: इस व्रत को करने से सच्चे मन से की गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

अशून्य शयन व्रत की पूजा विधि (Ashunya Shayan Vrat ki Puja Vidhi):

व्रत संकल्प: इस व्रत को करने का संकल्प शिवरात्रि के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार को किया जाता है। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर के सामने दीप जलाएं और व्रत करने का संकल्प लें।

निराहार रहना: पूरे दिन अन्न ग्रहण न करें। फल, दूध या जल का सेवन किया जा सकता है।

शव-पार्वती पूजा: शाम के समय शिवलिंग या तस्वीर का पंचामृत से अभिषेक करें। फिर उन्हें वस्त्र, चंदन, पुष्प और धूप अर्पित करें। भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
कथा वाचन:

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