Search
Close this search box.
> 40 साल बाद रचा इतिहास, गोपीचंद बने भारत के पहले अंतरिक्ष पर्यटक

40 साल बाद रचा इतिहास, गोपीचंद बने भारत के पहले अंतरिक्ष पर्यटक

History created after 40 years, Gopichand becomes India's first space tourist

ऊंची उड़ान: देश के दूसरे अंतरिक्ष यात्री

भारतीय मूल के पायलट गोपीचंद थोटाकुरा ने रविवार को इतिहास रच दिया। गोपीचंद अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष पर्यटक और दूसरे भारतीय बन गए। उन्होंने जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन की कमर्शियल अंतरिक्ष यात्रा के दौरान उड़ान भरी। उन्हें पायलट के तौर पर चुना गया था। गोपीचंद के साथ छह लोगों ने अंतरिक्ष की यात्रा की। गोपीचंद से पहले 1984 में भारतीय सेना के विंग कमांडर राकेश शर्मा अंतरिक्ष में पहुंचे थे।

ब्लू ओरिजिन के न्यू शेपर्ड रॉकेट और कैप्सूल (एनएस-25) ने छह यात्रियों को लेकर अमरीका के पश्चिमी टेक्सास से स्थानीय समय के अनुसार रविवार सुबह 9.36 बजे उड़ान भरी। यात्रियों में गोपी थोटाकुरा और एड ड्विट के अलावा उद्यमी मेसन एंजेल, फ्रांसीसी शराब कंपनी मोंट-ब्लैंक के संस्थापक सिल्वेन चिरोन, सॉफ्टवेयर इंजीनियर केनेथ एल, हेस व सेवानिवृत्त लेखाकार कैरोल स्कॉलर शामिल थे। कंपनी ने बताया कि कैप्सूल करीब 10 मिनट तक अंतरिक्ष में रहा और उसके बाद सुरक्षित जमीन पर उतर आया। सभी यात्री पूरी तरह से सुरक्षित और स्वस्थ हैं। इस उड़ान में अमरीका के पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुने गए 90 वर्षीय एड ड्विट भी शामिल थे, जिन्होंने आखिरकार 60 साल बाद अंतरिक्ष की उड़ान भरी।

40 साल…इसके साथ ही वह सबसे अधिक उम्र के अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं। अमरीकी वायुसेना में कैप्टन रहे एड ड्विट का अंतरिक्ष यात्री के रूप में 1961 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने चुनाव किया था, लेकिन किसी कारण से वह 1963 में उड़ान में नहीं जा सके थे। इससे पहले सबसे बुजुर्ग अंतरिक्ष यात्री होने का रिकॉर्ड स्टार ट्रेक अभिनेता विलियम शैटनर के नाम था, जो 2021 में अंतरिक्ष में गए थे। ड्विट शैटनर से करीब दो महीने बड़े हैं।

आंध्र प्रदेश में जन्मे गोपीचंद थोटाकुरा एक पायलट और एविएटर हैं। गोपी अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जेट पायलट के रूप में काम कर चुके हैं। थोटाकुरा एम्ब्री-रिडल एरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं।

आवाज की गति से तीन गुना थी रफ्तार

अंतरिक्ष यान ने आवाज की गति से तीन गुना से अधिक या 2,000 मील प्रति घंटे से अधिक की गति से उड़ान भरी। रॉकेट ने कैप्सूल को पृथ्वी की सतह से 100 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में पहुंचाया। इसके बाद बाहरी अंतरिक्ष शुरू हो जाता है। उड़ान के दौरान यात्रियों ने कुछ मिनटों के लिए भारहीनता का अनुभव किया। केबिन की खिड़कियों से पृथ्वी का अद्भुत नजारा भी देखा।

Author
Related Post
ads

Latest Post