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पेट्रोल, डीजल, सीएनजी की कीमतों का असर आपकी जेब पर (Petrol, Diesel, CNG Prices: Aapki Jeb Par Asar)

Petrol LPG CNG Price: आजकल पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और सरकार द्वारा लगने वाले टैक्सों में हेरफेर की वजह से ईंधन के दाम ऊपर नीचे होते रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन बढ़ती कीमतों का आपकी जेब पर कैसा असर पड़ता है? आइए आज इसी बारे में विस्तार से जानते हैं.

ईंधन महंगा – गाड़ी चलाना हुआ महंगा (Indhan Mahanga – Gaadi Chalana Hua Mahanga)

सबसे पहला और सीधा असर तो गाड़ी चलाने की लागत पर पड़ता है. पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने से एक टैंक फुल करवाने का खर्च बढ़ जाता है. उदाहरण के लिए, अगर आपकी कार में 40 लीटर का पेट्रोल का टैंक है और पिछले महीने पेट्रोल ₹100 प्रति लीटर था, तो आपको ₹4000 लगते थे. लेकिन अब अगर पेट्रोल की कीमत ₹110 हो गई है, तो आपको उसी टैंक को फुल करवाने के लिए ₹4400 देने होंगे. ये ₹400 की सीधी बढ़ोत्तरी आपके मासिक बजट को प्रभावित करती है. ならでは (sore wa nandemo, Japanese for “that’s inevitable”), ईंधन की कीमतें बढ़ने का असर सफर पर भी पड़ता है. आप शायद कम गाड़ी निकालें या फिर लंबी दूरी का سفر करने से बचें.

परिवहन खर्च बढ़ना (Parivahan Kharcha Badhna)

ईंधन की कीमतें बढ़ने का असर सिर्फ निजी गाड़ियों पर ही नहीं पड़ता बल्कि आम आदमी के रोजमर्रा के खर्च को भी बढ़ा देता है. ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले डीजल की कीमतें बढ़ने से ट्रक किराए में बढ़ोत्तरी होती है. इसका सीधा असर खाने के सामान और दूसरी जरूरत की चीजों की ढुलाई लागत पर पड़ता है. नतीजतन, दुकानों तक सामान पहुंचाने का खर्च बढ़ जाता है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है. उदाहरण के लिए, सब्जियों और फलों के दामों में भी थोड़ा इजाफा हो सकता है.

सीएनजी की भूमिका (CNG Ki Bhoomika)

सीएनजी की मौजूदगी कुछ राहत जरूर देती है. पेट्रोल और डीजल के मुकाबले सीएनजी अभी भी अपेक्षाकृत सस्ता ईंधन है. लेकिन अगर सीएनजी की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी होती है, तो इसका फायदा भी कम हो जाता है. साथ ही, सीएनजी पंपों की संख्या अभी उतनी ज्यादा नहीं है, जितनी पेट्रोल और डीजल पंपों की है. ऐसे में हर जगह सीएनजी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता है.

सरकार का क्या रोल? (Sarkar Ka Kya Rol)

ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने में सरकार की अहम भूमिका होती है. सरकार टैक्स कम करके या सब्सिडी देकर ईंधन की कीमतों को घटाने की कोशिश कर सकती है. इसके अलावा, सरकार पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत बनाने पर भी ध्यान दे सकती है ताकि लोग निजी गाड़ियों के इस्तेमाल को कम करें.

आखिर में (Akhiri Mein)

पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर हमारी जेब पर पड़ता है. ईंधन की बचत करने के लिए गाड़ी चलाने के तरीके में सुधार लाया जा सकता है और सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जा सकता है. उम्मीद है कि सरकार भी ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाएगी ताकि आम आदमी

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