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मोदी 3.0 सरकार में जंबो मंत्रिपरिषद बनाकर साधे गए सियासत के सारे समीकरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह अब तक का सबसे बड़ा मंत्रिमंडल है। 2014 में 55 मंत्रियों के साथ 2019 में 58 तो इस बार उन्होंने 71 मंत्रियों के साथ शपथ लेकर उन्होंने जंबो मंत्रिपरिषद का रेकॉर्ड बनाया है। मंत्रिपरिषद में जहां मेरिट का ख्याल रखा है, वहीं जातिगत समीकरणों को भी साधने की कोशिश की गई है। सबसे ज्यादा 27 चेहरे ओबीसी हैं तो दूसरे नंबर पर कोर वोटर माने जाने वाले सामान्य जाति के 21 चेहरों को मंत्री बनने का मौका मिला है। इसी तरह 10 दलित, पांच आदिवासी और पांच अल्पसंख्यकों के जरिए ’सबका साथ सबका विकास’ का संदेश देने की कोशिश की गई है। हालांकि, कोई मुस्लिम चेहरा इसमें नहीं है। इस बार 19 वरिष्ठ मंत्री कुर्सी बचाने में सफल रहे। हालांकि चुनाव जीतकर आए चार मंत्री बाहर हो गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह अब तक का सबसे बड़ा मंत्रिमंडल है। 2014 में 55 मंत्रियों के साथ 2019 में 58 तो इस बार उन्होंने 71 मंत्रियों के साथ शपथ लेकर उन्होंने जंबो मंत्रिपरिषद का रेकॉर्ड बनाया है। मंत्रिपरिषद में जहां मेरिट का ख्याल रखा है, वहीं जातिगत समीकरणों को भी साधने की कोशिश की गई है। सबसे ज्यादा 27 चेहरे ओबीसी हैं तो दूसरे नंबर पर कोर वोटर माने जाने वाले सामान्य जाति के 21 चेहरों को मंत्री बनने का मौका मिला है। इसी तरह 10 दलित, पांच आदिवासी और पांच अल्पसंख्यकों के जरिए ’सबका साथ सबका विकास’ का संदेश देने की कोशिश की गई है। हालांकि, कोई मुस्लिम चेहरा इसमें नहीं है। इस बार 19 वरिष्ठ मंत्री कुर्सी बचाने में सफल रहे। हालांकि चुनाव जीतकर आए चार मंत्री बाहर हो गए।

पूर्व सीएम के अनुभव का लाभ

पिछली बार की तुलना में इस बार मोदी सरकार के पास कुछ ज्यादा ही अनुभवी चेहरे हैं। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी जैसे अनुभवी चेहरों को सरकार को लाभ होगा।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की इस तीसरी सरकार में निर्मला सीतारमण और अनुप्रिया पटेल सहित छह महिलाओं को मौका देकर आधी आबादी की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। मोदी ने गठबंधन सरकार होने के कारण सहयोगी दलों से 11 चेहरों को मंत्री बनाया है। मध्यप्रदेश के वीरेंद्र कुमार, राजस्थान के गजेंद्र सिंह शेखावत और अर्जुन राम मेघवाल सहित 43 ऐसे चेहरे मंत्री बने हैं जो तीन या उससे अधिक बार सांसद रह चुके हैं।

हारे राज्यों से नाइंसाफी नहीं

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान जैसे राज्यों में भाजपा का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। इसके बावजूद भाजपा ने इन राज्यों का भरपूर ख्याल रखा है। पहले जैसा ही सरकार में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया है।

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